महिला बांझपन में जेनेटिक कारणों की भूमिका

महिला बांझपन में जेनेटिक कारणों की भूमिका

महिला बांझपन (Female Infertility) आज दुनिया भर में लाखों महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर 6 में से 1 व्यक्ति अपने जीवनकाल में किसी न किसी समय बांझपन की समस्या का सामना करता है। अक्सर लोग बांझपन का कारण केवल हार्मोनल असंतुलन, बढ़ती उम्र, पीसीओएस (PCOS) या जीवनशैली को मानते हैं, लेकिन कई मामलों में जेनेटिक (आनुवंशिक) कारण भी इसकी बड़ी वजह होते हैं।

विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में हुई प्रगति ने यह साबित किया है कि कई महिलाओं में गर्भधारण न हो पाने, बार-बार गर्भपात होने या IVF असफल होने के पीछे आनुवंशिक बदलाव (Genetic Mutations) या क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताएं जिम्मेदार हो सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर जेनेटिक जांच (Genetic Testing) करवाकर सही कारण का पता लगाया जा सकता है और उपचार की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि महिला बांझपन में जेनेटिक कारणों की भूमिका क्या है, कौन-कौन से आनुवंशिक विकार बांझपन का कारण बनते हैं, किन महिलाओं को जेनेटिक जांच करानी चाहिए और आधुनिक उपचार के कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं।

महिला बांझपन क्या है?

महिला बांझपन वह स्थिति है जिसमें महिला नियमित और असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पाती।

आमतौर पर—

  • 35 वर्ष से कम उम्र की महिला यदि 12 महीने तक प्रयास के बाद भी गर्भधारण नहीं कर पाती, तो इसे बांझपन माना जाता है।
  • 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं में 6 महीने तक प्रयास के बाद भी गर्भधारण न होना चिकित्सकीय जांच का संकेत है।

बांझपन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे—

  • ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्जन) में समस्या
  • हार्मोनल असंतुलन
  • फैलोपियन ट्यूब का बंद होना
  • गर्भाशय संबंधी समस्याएं
  • एंडोमेट्रियोसिस
  • बढ़ती उम्र
  • आनुवंशिक (Genetic) कारण

महिला बांझपन में जेनेटिक कारणों की भूमिका क्या है?

मानव शरीर की प्रत्येक कोशिका में 46 क्रोमोसोम होते हैं, जिनमें हमारे शरीर की संरचना और कार्यों से जुड़ी आनुवंशिक जानकारी होती है। यदि इन क्रोमोसोम या जीन में कोई असामान्यता हो जाए, तो इसका प्रभाव प्रजनन क्षमता (Fertility) पर पड़ सकता है।

महिला बांझपन में जेनेटिक कारणों की भूमिका निम्न प्रकार से हो सकती है—

  • अंडाशय (Ovary) का सही विकास न होना
  • अंडों (Eggs) की गुणवत्ता खराब होना
  • हार्मोन बनने में समस्या
  • भ्रूण (Embryo) का सही विकास न होना
  • बार-बार गर्भपात होना
  • समय से पहले रजोनिवृत्ति (Premature Menopause)
  • IVF की बार-बार असफलता

महिला बांझपन के प्रमुख जेनेटिक कारण

1. क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताएं (Chromosomal Abnormalities)

महिलाओं में सामान्यतः 46XX क्रोमोसोम होते हैं। यदि इनकी संख्या या संरचना में बदलाव हो जाए, तो बांझपन की संभावना बढ़ जाती है।

टर्नर सिंड्रोम (Turner Syndrome)

इस स्थिति में महिला के पास एक X क्रोमोसोम पूरी तरह विकसित नहीं होता।

इसके कारण—

  • अंडाशय का विकास रुक जाता है।
  • एस्ट्रोजन हार्मोन कम बनता है।
  • मासिक धर्म नहीं आता या बहुत कम आता है।
  • प्राकृतिक गर्भधारण कठिन हो जाता है।

बैलेंस्ड ट्रांसलोकेशन (Balanced Translocation)

कुछ महिलाओं में क्रोमोसोम का हिस्सा अपनी जगह बदल लेता है। महिला सामान्य दिखाई देती है, लेकिन इससे—

  • बार-बार गर्भपात
  • IVF असफल होना
  • भ्रूण में क्रोमोसोम संबंधी दोष

जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

2. प्रीमेच्योर ओवेरियन इंसफिशिएंसी (Premature Ovarian Insufficiency)

जब 40 वर्ष की आयु से पहले अंडाशय काम करना कम या बंद कर देते हैं, तो इसे Premature Ovarian Insufficiency (POI) कहा जाता है।

इसके पीछे कई जेनेटिक कारण पाए गए हैं।

लक्षण—

  • अनियमित पीरियड्स
  • जल्दी मेनोपॉज
  • AMH का कम होना
  • FSH का बढ़ना
  • गर्भधारण में कठिनाई

3. Fragile X Premutation

FMR1 जीन में बदलाव होने पर कुछ महिलाओं में अंडाशय समय से पहले काम करना बंद कर सकते हैं।

ऐसी महिलाओं में—

  • अंडों की संख्या कम होती है।
  • जल्दी मेनोपॉज आ सकता है।
  • गर्भधारण की संभावना घट जाती है।

4. विशेष जीन में बदलाव (Gene Mutations)

वैज्ञानिकों ने कई ऐसे जीन की पहचान की है जो महिला प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं।

इनमें प्रमुख हैं—

  • FOXL2
  • BMP15
  • NOBOX
  • FIGLA
  • GDF9

इन जीन में परिवर्तन होने पर—

  • अंडों का विकास प्रभावित होता है।
  • ओव्यूलेशन रुक सकता है।
  • अंडाशय जल्दी निष्क्रिय हो सकते हैं।

5. जन्मजात प्रजनन अंगों की असामान्यताएं

कुछ महिलाएं जन्म से ही गर्भाशय या प्रजनन अंगों की संरचनात्मक समस्याओं के साथ पैदा होती हैं।

MRKH Syndrome

इसमें—

  • गर्भाशय विकसित नहीं होता।
  • योनि आंशिक रूप से विकसित होती है।
  • अंडाशय सामान्य रहते हैं।

ऐसी महिलाओं में प्राकृतिक गर्भधारण संभव नहीं होता, लेकिन IVF और सरोगेसी (जहां कानूनी रूप से अनुमति हो) जैसे विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।

कौन-सी बीमारियां आनुवंशिक रूप से बांझपन का खतरा बढ़ाती हैं?

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)

हालांकि PCOS पूरी तरह आनुवंशिक नहीं है, लेकिन यदि परिवार में किसी महिला को PCOS है, तो अगली पीढ़ी में इसका जोखिम बढ़ जाता है।

इसके कारण—

  • ओव्यूलेशन प्रभावित होता है।
  • हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं।
  • गर्भधारण में कठिनाई होती है।

एंडोमेट्रियोसिस

यदि परिवार में मां या बहन को एंडोमेट्रियोसिस है, तो अन्य महिलाओं में इसका खतरा बढ़ जाता है।

यह बीमारी—

  • अंडाशय
  • फैलोपियन ट्यूब
  • गर्भाशय

को प्रभावित कर सकती है और बांझपन का कारण बन सकती है।

Congenital Adrenal Hyperplasia (CAH)

यह एक आनुवंशिक हार्मोनल विकार है जिसमें शरीर अधिक एंड्रोजन हार्मोन बनाता है।

इसके कारण—

  • अनियमित पीरियड्स
  • ओव्यूलेशन में समस्या
  • गर्भधारण में कठिनाई

हो सकती है।

जेनेटिक कारण अंडों की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करते हैं?

महिला के अंडों की गुणवत्ता सफल गर्भधारण के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है।

यदि जीन या क्रोमोसोम में गड़बड़ी हो, तो—

  • अंडों में क्रोमोसोम की संख्या गलत हो सकती है।
  • भ्रूण सही तरीके से विकसित नहीं होता।
  • इम्प्लांटेशन असफल हो सकता है।
  • बार-बार गर्भपात हो सकता है।

उम्र बढ़ने के साथ यह जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।

बार-बार गर्भपात और जेनेटिक कारण

लगातार दो या तीन बार गर्भपात होना केवल हार्मोनल समस्या नहीं होता।

कई मामलों में—

  • क्रोमोसोम असामान्यता
  • बैलेंस्ड ट्रांसलोकेशन
  • जीन संबंधी दोष

मुख्य कारण होते हैं।

ऐसे मामलों में पति-पत्नी दोनों की जेनेटिक जांच कराई जाती है।

महिला बांझपन में जेनेटिक जांच क्यों जरूरी है?

आज आधुनिक चिकित्सा में कई प्रकार की जेनेटिक जांच उपलब्ध हैं।

1. Karyotyping

इस जांच से क्रोमोसोम की संख्या और संरचना की जांच की जाती है।

यह जांच विशेष रूप से उपयोगी है यदि—

  • बार-बार गर्भपात हो
  • IVF असफल हो
  • मासिक धर्म न आता हो
  • Premature Ovarian Failure हो

2. Carrier Screening

यह जांच यह पता लगाती है कि महिला किसी आनुवंशिक बीमारी की वाहक (Carrier) है या नहीं।

3. FMR1 Gene Test

यह जांच Fragile X Premutation की पहचान करती है।

4. Whole Exome Sequencing

यदि सामान्य जांचों में कारण न मिले, तो यह आधुनिक जांच दुर्लभ जीन संबंधी समस्याओं की पहचान कर सकती है।

IVF में जेनेटिक्स की भूमिका

आज IVF उपचार में जेनेटिक तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

Preimplantation Genetic Testing (PGT)

IVF के दौरान बने भ्रूण की जांच करके स्वस्थ भ्रूण का चयन किया जाता है।

इसके लाभ—

  • स्वस्थ भ्रूण का चयन
  • गर्भपात का खतरा कम
  • सफल इम्प्लांटेशन
  • आनुवंशिक रोग आगे जाने से रोकने में सहायता
  • IVF की सफलता बढ़ना

PGT के प्रमुख प्रकार—

  • PGT-A – क्रोमोसोम जांच
  • PGT-M – जीन संबंधी रोग
  • PGT-SR – क्रोमोसोम संरचना संबंधी दोष

क्या जेनेटिक कारणों से होने वाला बांझपन ठीक हो सकता है?

हर आनुवंशिक समस्या का इलाज संभव नहीं है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा से गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जा सकती है।

उपचार में शामिल हो सकते हैं—

  • हार्मोन थेरेपी
  • ओव्यूलेशन दवाएं
  • IVF
  • PGT के साथ IVF
  • डोनर एग
  • एम्ब्रियो डोनेशन
  • फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन
  • जेनेटिक काउंसलिंग

उचित उपचार का चुनाव महिला की उम्र, स्वास्थ्य और जेनेटिक रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है।

किन महिलाओं को जेनेटिक जांच करानी चाहिए?

निम्न स्थितियों में जेनेटिक टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है—

  • लंबे समय से गर्भधारण न होना
  • बार-बार गर्भपात होना
  • बार-बार IVF असफल होना
  • समय से पहले मेनोपॉज
  • AMH का बहुत कम होना
  • परिवार में आनुवंशिक बीमारी होना
  • जन्मजात प्रजनन अंगों की समस्या
  • Premature Ovarian Insufficiency

क्या जीवनशैली से जोखिम कम किया जा सकता है?

हालांकि जीन को बदला नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करती है।

इसके लिए—

  • संतुलित आहार लें।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • धूम्रपान और शराब से बचें।
  • तनाव कम रखें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • समय-समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं।

निष्कर्ष

महिला बांझपन में जेनेटिक कारणों की भूमिका आज चिकित्सा विज्ञान में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताएं, जीन में बदलाव, प्रीमेच्योर ओवेरियन इंसफिशिएंसी, फ्रैजाइल एक्स प्रीम्यूटेशन और अन्य आनुवंशिक विकार महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। अच्छी बात यह है कि आधुनिक जेनेटिक जांच, जेनेटिक काउंसलिंग और IVF के साथ प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (PGT) जैसी तकनीकों ने इन समस्याओं की पहचान और उपचार को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बना दिया है।

यदि किसी महिला को लंबे समय से गर्भधारण में कठिनाई हो रही है, बार-बार गर्भपात हो रहा है या IVF बार-बार असफल हो रहा है, तो केवल हार्मोनल जांच ही नहीं बल्कि जेनेटिक मूल्यांकन भी करवाना चाहिए। सही समय पर निदान और विशेषज्ञ की सलाह से अनेक महिलाएं सफल गर्भधारण का सपना साकार कर सकती हैं।

 

 

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Frequently Asked Questions (FAQ)

1. क्या महिला बांझपन आनुवंशिक हो सकता है?

हाँ, कई मामलों में बांझपन का कारण आनुवंशिक होता है। कुछ जीन और क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताएं प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

 

2. क्या जेनेटिक टेस्ट से बांझपन का कारण पता चल सकता है?

हाँ, कई मामलों में Karyotyping, FMR1 टेस्ट और अन्य जेनेटिक जांचों से बांझपन के मूल कारण की पहचान की जा सकती है।

 

3. क्या जेनेटिक समस्या होने पर प्राकृतिक गर्भधारण संभव है?

यह समस्या के प्रकार पर निर्भर करता है। कुछ महिलाएं प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कर सकती हैं, जबकि अन्य को IVF या अन्य प्रजनन उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

 

4. IVF में PGT क्यों किया जाता है?

PGT भ्रूण की आनुवंशिक जांच करके स्वस्थ भ्रूण के चयन में मदद करता है, जिससे सफल गर्भधारण और स्वस्थ शिशु की संभावना बढ़ सकती है।

 

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Dr Anushka Madan

Dr Anushka Madan is an established is an IVF expert for reproductive medicine & technology with over 25+ years of experience.

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