सेकेंडरी इनफर्टिलिटी

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी: एक स्वस्थ बच्चे के बाद दोबारा गर्भधारण में परेशानी क्यों होती है?

जब किसी दंपति का पहला बच्चा बिना किसी बड़ी परेशानी के हो जाता है, तो आमतौर पर उम्मीद रहती है कि अगली बार भी गर्भधारण आसानी से हो जाएगा। लेकिन कई बार ऐसा नहीं होता। लंबे समय तक प्रयास करने के बावजूद दूसरी बार गर्भधारण न होने पर चिंता और उलझन होना स्वाभाविक है।

इस स्थिति को सेकेंडरी इनफर्टिलिटी (Secondary Infertility) कहा जाता है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति पहले गर्भधारण कर चुका है, लेकिन बाद में दोबारा गर्भधारण करने में परेशानी हो रही है।

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी कई कारणों से हो सकती है। उम्र बढ़ना, ओव्यूलेशन में बदलाव, एंडोमेट्रियोसिस, फैलोपियन ट्यूब में समस्या, गर्भाशय से जुड़ी स्थितियां और पुरुषों में स्पर्म की गुणवत्ता में बदलाव इसके संभावित कारणों में शामिल हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले एक स्वस्थ बच्चे का होना इस बात की गारंटी नहीं है कि भविष्य में प्रजनन क्षमता हमेशा समान रहेगी।

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी क्या है?

जब किसी महिला या दंपति को पहले गर्भधारण हो चुका हो, लेकिन बाद में नियमित रूप से प्रयास करने के बावजूद दोबारा गर्भधारण करने में कठिनाई हो, तो इसे सेकेंडरी इनफर्टिलिटी कहा जाता है।

यह स्थिति इन परिस्थितियों के बाद भी हो सकती है:

  • पहले एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ हो।
  • पहले एक या उससे अधिक गर्भधारण हुए हों।
  • पिछली गर्भावस्था का परिणाम मिसकैरेज रहा हो।
  • पिछली गर्भावस्था किसी दूसरे पार्टनर के साथ हुई हो।

इसके विपरीत, प्राइमरी इनफर्टिलिटी में व्यक्ति को पहले कभी गर्भधारण नहीं हुआ होता।

एक स्वस्थ बच्चे के बाद सेकेंडरी इनफर्टिलिटी क्यों होती है?

पहली बार सफल गर्भधारण यह बताता है कि उस समय गर्भधारण संभव था। लेकिन प्रजनन क्षमता समय के साथ बदल सकती है।

पहले बच्चे और अगले गर्भधारण के बीच कई साल का अंतर हो सकता है। इस दौरान शरीर, हार्मोन, अंडों की गुणवत्ता, स्पर्म की गुणवत्ता और प्रजनन तंत्र में बदलाव हो सकते हैं।

1. बढ़ती उम्र

महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ अंडों की संख्या और गुणवत्ता में धीरे-धीरे कमी आती है। इससे गर्भधारण की संभावना प्रभावित हो सकती है।

अगर पहले बच्चे के जन्म के कई साल बाद दूसरी प्रेग्नेंसी की कोशिश शुरू की जाती है, तो उम्र एक महत्वपूर्ण कारक हो सकती है।

उम्र पुरुषों की प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है, हालांकि इसका प्रभाव महिलाओं से अलग होता है।

2. ओव्यूलेशन में बदलाव

गर्भधारण के लिए नियमित ओव्यूलेशन आवश्यक है। केवल पीरियड्स का नियमित होना हमेशा यह साबित नहीं करता कि हर महीने सामान्य रूप से ओव्यूलेशन हो रहा है।

ओव्यूलेशन प्रभावित होने के कुछ संभावित कारण हैं:

  • PCOS
  • थायरॉइड संबंधी समस्याएं
  • वजन में बड़ा बदलाव
  • अत्यधिक व्यायाम
  • प्रोलैक्टिन का बढ़ना
  • कुछ दवाएं
  • पेरिमेनोपॉज
  • अन्य हार्मोनल समस्याएं

अगर ओव्यूलेशन नियमित नहीं हो रहा है, तो गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है।

3. एंडोमेट्रियोसिस

एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगती हैं।

यह कुछ महिलाओं में प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण सूजन, पेल्विक चिपकाव या अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब के आसपास बदलाव हो सकते हैं।

किसी महिला को पहले बच्चे के समय एंडोमेट्रियोसिस की समस्या न रही हो और बाद में इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

4. फैलोपियन ट्यूब में रुकावट

फैलोपियन ट्यूब प्राकृतिक गर्भधारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अंडा और स्पर्म सामान्य रूप से यहीं मिलते हैं।

फैलोपियन ट्यूब में रुकावट या नुकसान के संभावित कारणों में शामिल हैं:

  • पेल्विक इंफेक्शन
  • पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज
  • एंडोमेट्रियोसिस
  • पिछली पेल्विक सर्जरी
  • पेट या पेल्विस में सूजन

ट्यूब में समस्या होने पर स्पर्म और अंडे का मिलना मुश्किल हो सकता है।

5. गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं

पहले बच्चे के बाद गर्भाशय में कुछ स्थितियां विकसित हो सकती हैं या पहले से मौजूद समस्या अधिक स्पष्ट हो सकती है।

इनमें शामिल हैं:

  • फाइब्रॉइड
  • एंडोमेट्रियल पॉलीप
  • एडेनोमायोसिस
  • गर्भाशय के अंदर चिपकाव
  • कुछ संरचनात्मक समस्याएं

हर फाइब्रॉइड या पॉलीप इनफर्टिलिटी का कारण नहीं होता। इसका प्रभाव उसके आकार, स्थान और गर्भाशय की कैविटी पर निर्भर करता है।

6. पुरुषों में स्पर्म से जुड़ी समस्या

गर्भधारण केवल महिला की प्रजनन क्षमता पर निर्भर नहीं करता। पुरुषों में स्पर्म की संख्या, गतिशीलता और आकार सहित कई कारक गर्भधारण को प्रभावित कर सकते हैं।

पहली बार बच्चा होने के बाद भी पुरुषों की स्पर्म क्वालिटी में समय के साथ बदलाव आ सकता है।

इसीलिए इनफर्टिलिटी की जांच में सीमन एनालिसिस (Semen Analysis) एक महत्वपूर्ण जांच हो सकती है।

7. वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में बदलाव

बहुत अधिक या बहुत कम वजन कुछ लोगों में हार्मोन और ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकता है।

वजन में बदलाव का संबंध इन चीजों से हो सकता है:

  • अनियमित पीरियड्स
  • ओव्यूलेशन में बदलाव
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस
  • हार्मोनल असंतुलन
  • गर्भावस्था से जुड़े कुछ जोखिम

हालांकि, केवल वजन को इनफर्टिलिटी का कारण मान लेना सही नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति का मूल्यांकन अलग तरीके से किया जाना चाहिए।

8. पिछली सर्जरी या इंफेक्शन

पिछली पेट या पेल्विक सर्जरी के बाद कुछ मामलों में अंदरूनी चिपकाव यानी adhesions हो सकते हैं।

इसी तरह कुछ पेल्विक इंफेक्शन फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इसलिए डॉक्टर को पिछली सर्जरी, इंफेक्शन और गर्भावस्था से जुड़ी पूरी जानकारी देना महत्वपूर्ण होता है।

9. कभी-कभी कारण स्पष्ट नहीं होता

कई मामलों में सभी सामान्य जांचों के बाद भी इनफर्टिलिटी का कोई स्पष्ट कारण नहीं मिलता। इसे अनएक्सप्लेन्ड इनफर्टिलिटी (Unexplained Infertility) कहा जाता है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि गर्भधारण संभव नहीं है। इसका मतलब केवल यह है कि उपलब्ध सामान्य जांचों से कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के लक्षण क्या हैं?

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी का मुख्य संकेत गर्भधारण न होना है। इसके अपने कोई खास लक्षण जरूरी नहीं होते।

हालांकि, कुछ लक्षण किसी संभावित कारण की ओर संकेत कर सकते हैं, जैसे:

  • पीरियड्स का अनियमित होना
  • पीरियड्स का लंबे समय तक न आना
  • बहुत दर्दनाक पीरियड्स
  • पेल्विक दर्द
  • सेक्स के दौरान दर्द
  • असामान्य ब्लीडिंग
  • पहले पेल्विक इंफेक्शन का इतिहास
  • पुरुषों में इरेक्शन या इजैकुलेशन से जुड़ी परेशानी

कई लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता और केवल गर्भधारण में देरी ही समस्या का संकेत होती है।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

फर्टिलिटी जांच की जरूरत उम्र और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

डॉक्टर या फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से जल्दी सलाह लेना उचित हो सकता है अगर:

  • महिला की उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक है।
  • पीरियड्स अनियमित हैं या नहीं आते।
  • एंडोमेट्रियोसिस की आशंका है।
  • पहले पेल्विक इंफेक्शन हो चुका है।
  • फैलोपियन ट्यूब से जुड़ी समस्या का इतिहास है।
  • पहले पेल्विक या पेट की सर्जरी हुई है।
  • पुरुषों में स्पर्म से जुड़ी समस्या की आशंका है।
  • बार-बार मिसकैरेज हुआ है।
  • पहले से कोई ऐसी मेडिकल या रिप्रोडक्टिव समस्या है जो फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती है।

अगर कोई ज्ञात जोखिम कारक मौजूद है, तो केवल एक निश्चित अवधि तक इंतजार करना जरूरी नहीं होता। डॉक्टर स्थिति के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं।

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी की जांच कैसे होती है?

फर्टिलिटी जांच आमतौर पर मेडिकल और रिप्रोडक्टिव हिस्ट्री से शुरू होती है।

मेडिकल हिस्ट्री

डॉक्टर इन बातों के बारे में पूछ सकते हैं:

  • उम्र
  • पिछली प्रेग्नेंसी और डिलीवरी
  • पीरियड्स का पैटर्न
  • पिछली गर्भावस्था में हुई परेशानियां
  • मिसकैरेज का इतिहास
  • पेल्विक इंफेक्शन
  • पिछली सर्जरी
  • चल रही दवाएं
  • अन्य मेडिकल समस्याएं
  • सेक्स की नियमितता
  • पहले हुए फर्टिलिटी ट्रीटमेंट

ओव्यूलेशन की जांच

डॉक्टर यह पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं कि नियमित रूप से ओव्यूलेशन हो रहा है या नहीं।

इसके लिए मेडिकल हिस्ट्री, कुछ ब्लड टेस्ट, ओव्यूलेशन ट्रैकिंग या अन्य जांचों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सीमन एनालिसिस

सीमन एनालिसिस में स्पर्म की संख्या, उनकी गति और आकार जैसे कई पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है।

क्योंकि पुरुषों से जुड़े कारक भी गर्भधारण में भूमिका निभा सकते हैं, इसलिए पुरुष पार्टनर की जांच भी महत्वपूर्ण है।

ओवेरियन रिजर्व टेस्ट

कुछ मामलों में डॉक्टर AMH, FSH, Estradiol और Antral Follicle Count जैसी जांचों की सलाह दे सकते हैं।

हालांकि, इन टेस्ट को केवल “फर्टिलिटी टेस्ट” समझना सही नहीं है। ये टेस्ट ओवेरियन रिजर्व के बारे में जानकारी दे सकते हैं, लेकिन अकेले यह तय नहीं करते कि प्राकृतिक रूप से गर्भधारण होगा या नहीं।

अल्ट्रासाउंड और फैलोपियन ट्यूब की जांच

अल्ट्रासाउंड से गर्भाशय और अंडाशय की स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकती है।

जरूरत पड़ने पर डॉक्टर फैलोपियन ट्यूब खुली हैं या नहीं, यह जांचने के लिए HSG जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी का इलाज कैसे किया जाता है?

इलाज का चुनाव इसके कारण, उम्र, कितने समय से गर्भधारण की कोशिश की जा रही है और दोनों पार्टनर्स की व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

1. लाइफस्टाइल और प्रीकॉन्सेप्शन केयर

डॉक्टर कुछ सामान्य स्वास्थ्य संबंधी बदलावों की सलाह दे सकते हैं, जैसे:

  • फोलिक एसिड वाला उपयुक्त प्रीनेटल विटामिन लेना
  • धूम्रपान और तंबाकू से बचना
  • शराब का सेवन सीमित या बंद करना
  • दवाओं की डॉक्टर से समीक्षा कराना
  • पुरानी बीमारियों को नियंत्रित रखना
  • संतुलित आहार लेना
  • नियमित शारीरिक गतिविधि करना

लाइफस्टाइल में बदलाव स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता को सपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन हर प्रकार की इनफर्टिलिटी को इससे ठीक नहीं किया जा सकता।

2. ओव्यूलेशन के लिए दवाएं

अगर समस्या ओव्यूलेशन से जुड़ी है, तो डॉक्टर ओव्यूलेशन को बढ़ावा देने वाली दवाओं का उपयोग कर सकते हैं।

कौन-सी दवा और कितनी मात्रा उपयुक्त होगी, यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। ऐसी दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की निगरानी में करना जरूरी है।

3. संरचनात्मक समस्याओं का इलाज

अगर फाइब्रॉइड, पॉलीप, एंडोमेट्रियोसिस, adhesions या अन्य संरचनात्मक समस्या फर्टिलिटी को प्रभावित कर रही है, तो डॉक्टर उसके अनुसार उपचार की सलाह दे सकते हैं।

हर स्थिति में सर्जरी आवश्यक नहीं होती। इलाज का निर्णय व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है।

4. IUI

IUI यानी Intrauterine Insemination में तैयार किए गए स्पर्म को ओव्यूलेशन के आसपास गर्भाशय में डाला जाता है।

कुछ विशेष परिस्थितियों में IUI उपचार का विकल्प हो सकता है, जैसे कुछ मामलों में unexplained infertility या कुछ प्रकार की sperm-related समस्याएं।

5. IVF

IVF यानी In Vitro Fertilization में अंडों को निकालकर लैब में स्पर्म से fertilize किया जाता है और बनने वाले embryo को गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है।

IVF कुछ परिस्थितियों में उपयोगी उपचार विकल्प हो सकता है, जैसे फैलोपियन ट्यूब से जुड़ी गंभीर समस्या, कुछ पुरुष-कारक समस्याएं, एंडोमेट्रियोसिस या अन्य स्थितियां।

क्या सेकेंडरी इनफर्टिलिटी को रोका जा सकता है?

हर मामले को रोकना संभव नहीं है।

उम्र से जुड़े बदलाव और कुछ मेडिकल स्थितियां पूरी तरह हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं। फिर भी कुछ कदम प्रजनन और सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं:

  • सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन का समय पर इलाज कराना
  • धूम्रपान और तंबाकू से बचना
  • पुरानी बीमारियों को नियंत्रित रखना
  • दवाओं के संभावित प्रभावों के बारे में डॉक्टर से बात करना
  • संतुलित और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना
  • जरूरत पड़ने पर समय पर फर्टिलिटी जांच कराना

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी का भावनात्मक असर

दोबारा गर्भधारण न कर पाना भावनात्मक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कई माता-पिता सोच सकते हैं, “जब पहली बार सब ठीक था, तो अब ऐसा क्यों हो रहा है?”

इसके साथ चिंता, निराशा, अपराधबोध या अकेलेपन की भावना भी हो सकती है। लेकिन पिछली सफल प्रेग्नेंसी इस समस्या को कम महत्वपूर्ण नहीं बनाती।

ऐसे समय में:

  • पार्टनर के साथ खुलकर बात करें।
  • खुद को या पार्टनर को दोष न दें।
  • भरोसेमंद लोगों से भावनात्मक सहयोग लें।
  • जरूरत पड़ने पर काउंसलर की मदद लें।
  • फर्टिलिटी डॉक्टर से उपलब्ध विकल्पों और उनकी सीमाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी लें।

निष्कर्ष

एक स्वस्थ बच्चे के बाद दोबारा गर्भधारण में परेशानी होना कई दंपतियों के लिए अप्रत्याशित अनुभव हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पहली प्रेग्नेंसी के बाद शरीर में कुछ “गलत” ही हुआ है।

उम्र, ओव्यूलेशन, अंडों की गुणवत्ता, स्पर्म हेल्थ, फैलोपियन ट्यूब, गर्भाशय और एंडोमेट्रियोसिस जैसी कई स्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं।

इसलिए लंबे समय तक गर्भधारण न होने पर केवल अनुमान लगाने के बजाय समय पर फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह और उचित जांच कराना अधिक उपयोगी होता है।

हर दंपति की स्थिति अलग होती है और सही उपचार का चुनाव व्यक्तिगत मेडिकल रिपोर्ट और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।

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Dr Anushka Madan is an established is an IVF expert for reproductive medicine & technology with over 25+ years of experience.

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